बच्चे को 102 बुखार हो तो क्या करें?HealthPlanet

Posted on Fri 23rd Dec 2022 : 13:51

यह आपके शिशु की उम्र पर निर्भर करता है। यदि शिशु छह महीने से कम उम्र का है तो बुखार होना चिंताजनक हो सकता है।

नन्हें शिशुओं को तेज बुखार होना असामान्य है, और यदि तेज बुखार हो, तो यह इस बात की चेतावनी है कि कुछ गड़बड़ जरुर है।

शिशु को तुरंत डॉक्टर के पास ले जाएं, यदि वह:

तीन महीने से कम उम्र का है और उसे 100.4 डिग्री फेहरनहाइट या इससे ज्यादा बुखार हो।

तीन से छह महीने की उम्र का है और उसका तापमान 102.2 डिग्री फेहरनहाइट या इससे ज्यादा हो।

मगर यदि आपका शिशु छह महीने से बड़ा है, तो आप उसकी स्वास्थ्य स्थिति का अंदाजा हमेशा उसके बढ़े हुए तापमान से नहीं लगा सकती हैं। आमतौर पर बुखार का कोर्स पूरा होने देना ठीक रहता है और कई बुखार बहुत जल्द और अपने आप ठीक हो जाते हैं।

इस उम्र में, यदि आपके शिशु को बुखार हो मगर वह इससे प्रभावित न लग रहा हो हो सामान्य ढंग से खेल और दूध पी रहा हो तो आपको चिंता करने की जरुरत नहीं है। मगर, फिर भी आपको उसपर नजर रखनी पड़ेगी कि वह पहले से बेहतर महसूस कर रहा है या नहीं। साथ ही अन्य चिंताजनक संकेतों जैसे कि सांस लेने में परेशानी, भूख कम लगना, उनींदा होना या आसपास की चीजों में रुचि न दिखाना आदि पर ध्यान दें।

अतिरिक्त सलाह के लिए हमेशा अपने डॉक्टर से बात करें। उदाहरण के तौर पर शिशु का बुखार यदि 104 डिग्री पहुंच जाए तो डॉक्टर आपको तुरंत आने के लिए कह सकते हैं। या फिर 24 घंटों के बाद भी बुखार बना रहे, फिर चाहे अन्य लक्षण हो या नहीं।


बच्चे का बुखार ठीक करने के लिए मैं क्या कर सकती हूं?
शिशु को आराम पहुंचाने के लिए आप नीचे दिए गए उपायों को अपना सकती हैं:

अपने शिशु को खूब सारा तरल पदार्थ पीने के लिए दें, ताकि वह जलनियोजित (हाइड्रेटेड) रह सके। यदि वह अनन्य ​स्तनपान (एक्सक्लूसिव ब्रेस्टफीडिंग) करता है, तो उसे अतिरिक्त स्तनपान करवाएं। यदि वह फॉर्मूला दूध पीता है, तो उसे उबालकर ठंडा किया गया पानी भी पिलाएं।

अगर आपके शिशु ने ठोस आहार खाना शुरु कर दिया है, तो यदि बुखार के पहले दिन वह खाना न खाना चाहे तो चिंता न करें। पहले दिन के बाद उसे छोटे-मोटे स्नैक्स देती रहें ताकि उसका ऊर्जा का स्तर बना रहे।

बीमार होने पर आपका शिशु आराम करना चाहेगा, ​इसलिए उसे रिलैक्स करने या झपकी लेने में मदद करें। उसे कहानी पढ़कर सुनाएं और लेटे हुए छोटे-मोटे खेल खिला सकती हैं।

शिशु को ऐसे कपड़े पहनाए जिनमें वह सबसे ज्यादा आरामदायक रहे, उसके सिर को न ढकें। बहुत ज्यादा कपड़े पहनाकर उसके शरीर में गर्मी न बढ़ाएं। रजाई और दौहर की बजा चादर और हल्के कंबल ज्यादा सही रहते हैं और जरुरत के अनुसार आप इन्हें हटा भी सकती हैं।

बुखार कम करने के लिए शिशु का मुंह, गर्दन, बाजुएं और टांगों को हल्के गुनगुने पानी से पौंछें।

रात में समय-समय पर शिशु की जांच करती रहें।

बेहतर महसूस होने तक शिशु को क्रेच या डेकेयर न भेजें।

शिशु यदि असहज या परेशान हो तो डॉक्टर अधिकांश मामलों में शिशुओं को इन्फेंट पैरासिटामोल देने की सलाह देते हैं। मगर शिशु को किसी भी तरह की कोई दवाई देने से पहले हमेशा अपने डॉक्टर से सलाह करें। साथ ही आप डॉक्टर को दिखाएं बिना दवा देकर अन्य लक्षणों को दबाना नहीं चाहेंगी।

खुराक को लेकर शिशु के डॉक्टर की सलाह का पालन करें। सही खुराक बच्चे के वजन के अनुसार निर्धारित होती है न कि उसकी उम्र के अनुसार। डॉक्टर आपको सही खुराक की गणना करने में मदद करेंगे।

सही मात्रा में खुराक देने के लिए शिशु को दवा के साथ आने वाले माप कप का इस्तेमाल करें। साथ ही, लिखकर रख लें कि शिशु को दवाई कब दी थी ताकि आप बुखार कम करने की दवा निर्देशित मात्रा से अधिक न दे दें।

आपने शायद पैरासिटामोल और​ शिशुओं में सांस फूलने या अस्थमा की समस्या होने के बीच संबंध के बारे में सुना होगा। मगर, चिंता न करें, इस बात के कोई प्रमाण नहीं हैं कि पैरासिटामोल से ये समस्याएं होती हैं। यदि डॉक्टर की सलाह के अनुसार शिशु को सही खुराक दी जाए तो पैरासिटामोल सुरक्षित है।
यदि आपके शिशु को डेंगू जैसी बीमारी है या फिर डॉक्टर को लगता है कि उसके लक्षणों की वजह डेंगू हो सकता है तो वे आपको शिशु को आईबूप्रोफेन या मेफ्टाल न देने की सलाह देंगे। ये उसके खून में से प्लेटलेट्स कम कर सकते हैं और रक्तस्त्राव का खतरा बढ़ सकता है।
आपको बच्चे को कभी भी एस्पिरिन नहीं देनी चाहिए। एस्पिरिन को रेज सिंड्रोम के साथ जोड़ा जाता है, यह एक दुर्लभ मगर गंभीर और कभी-कभार जानलेवा स्थिति हो सकती है।

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